गर्भपात/एबोर्सन के कितने दिनों के बाद सेक्स करना सुरक्षित होता है। Abortion ke kitne din bad sex karna chahie

जब कोई महिला गर्भवती होती है तो इसकी खुशी केवल उस महिला को ही नहीं होती है बल्कि उसके संपूर्ण परिवार को यह खुशी का बहुत बड़ा पल होता है। जब किसी परिवार में नन्हे बच्चे की आने का समाचार मिलता है तो वह परिवार खुशियों से झूम उठता है

गर्भपात के बाद कब सेक्स करना चाहिए। एबॉर्शन के बाद कितने दिनों तक सेक्स नहीं करना चाहिए। गर्भपात कराने के बाद सेक्स करने का सही तरीका। Abortion karne ke kitne dinon ke bad sex karna surakshit hota hai। एबॉर्शन के कितने दिनों के बाद शारीरिक संबंध बनाने चाहिए। गर्भपात के कितने दिन के बाद संभोग करना चाहिए। गर्भपात के बाद कितने दिनों के बाद गर्भ धारण करना चाहिए। गर्भपात के प्रभाव और उसके मुख्य लक्षण। एबॉर्शन के कितने दिन के बाद पीरियड आता है। गर्भपात के कितने दिन बाद गर्भ ठहरता है। Garbhpat ke bad kab sex karna surakshit hota hai। Abortion ke kitne din bad sex karna chahie।

जब कोई महिला गर्भवती होती है तो वह अपने आप को बहुत खुशनसीब महसूस करती है लेकिन यह खुशी कभी कभी दुखद घटना को भी उत्पन्न कर सकती हैै

गर्भपात/एबोर्सन के कितने दिनों के बाद सेक्स करना सुरक्षित होता है। Abortion ke kitne din bad sex karna chahie

महिला के गर्भवती होने के बाद यदि वह अपने गर्व का सही तरीके से देखरेख नहीं कर पाती है तो किसी सामान्य परिस्थिति के परिणाम स्वरूप जब शिशु का जन्म लेने से पहले ही शिशु गर्भ में ही समाप्त हो जाता है तब यह स्थिति मां और परिवार के सदस्यों के बीच काफी ज्यादा समस्याएं उत्पन्न कर देती है

जब कोई महिला का गर्भपात होता है तो इसका प्रभाव महिला के भावनाओं पर पड़ने के साथ-साथ उस के नकारात्मक प्रभाव को भी उत्पन्न करता है। जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो उसमें उस महिला को अत्यंत पीड़ा सहन करनी पड़ती है जिसका हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं

एक महिला का जब गर्भपात होता है तो उसके दिमाग में कई सारे सवाल विचलित होने लगती है कि क्या वह दोबारा से मां बन पाएगी? क्या उनके लिए दोबारा है गर्भधारण करना उचित रहेगा? गर्भपात होने के बाद सेक्स के प्रति किस तरह का ध्यान रखना चाहिए? आदि अनेक सारे सवाल एक महिला के दिमाग में चलने लगते हैं जब उसका गर्भपात हो जाता है

ऐसी परिस्थिति में सबसे पहले महिला के सामने यह सवाल आ जाता है कि उसको अपने जीवनसाथी को खुश करने के लिए सेक्स के बारे में किस तरह रहना चाहिए और उसको कितने समय तक गर्भपात हो जाने पर सेक्स नहीं करना चाहिए। या फिर महिला जब दूसरी बार प्रेग्नेंट होना चाहे तो पहले गर्भपात के कितने समय के बाद वह प्रेग्नेंट हो ताकि भविष्य में उसके स्वास्थ्य और बच्चे दोनों के लिए सही रहे

हमने आपको ऊपर भी बताया था कि जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो उसको अत्यंत ज्यादा पीड़ा होती है। आज की इस लेख में हम आपको गर्भपात से जुड़ी हर जानकारी को पूरी तरह से देने की कोशिश करेंगे

गर्भपात के कितने दिनों बाद सेक्स करना सुरक्षित होता है। Abortion ke kitne din bad sex karna chahie

तो यह दोस्तों अब हम जानते हैं कि गर्भपात अखिल क्या होता है और मुख्य रूप से गर्भपात कितने प्रकार का होता है। जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो उस महिला के शरीर में किस प्रकार के बदलाव देखने को मिलते हैं और गर्भपात हो जाने के कितने दिनों के बाद आपको शारीरिक संबंध बनाने चाहिए। इसके अलावा आज के आर्टिकल में हम आपको यह भी बताएंगे कि गर्भपात के बाद किस प्रकार की सावधानी बरतनी चाहिए

मुख्य रूप से गर्भपात कितने प्रकार के होते हैं।How many types of abortions are there

जब किसी महिला का गर्व का समय पूर्व होने से पहले ही गर्भ समाप्त हो जाता है तो इस प्रकार की स्थिति गर्भपात कहलाती है। मुख्य रूप से गर्भपात की समस्या गर्भ में भ्रूण का सही तरह से विकास नहीं होने की वजह से उत्पन्न होती है

मेडिसिन की सहायता से गर्भपात दो तरीके से कराए जा सकते हैं जैसे की गोलियों से गर्भपात(medical abortion) और इसके अलावा दूसरा तरीका है सर्जिकल(surgical abortion) गर्भपात

किसी महिला को गर्भपात के लिए कौन सी विधि अपनाने चाहिए यह महिला के प्रेगनेंसी की अवधि पर निर्भर करता है। प्रेगनेंसी के शुरुआती हफ्तों में पिंपल्स के द्वारा और 10 सप्ताह से ज्यादा की प्रेगनेंसी में सर्जरी के द्वारा गर्भपात या एबॉर्शन किया जाए तो यह सुरक्षित रहता है। लेकिन आपके लिए इतनी जानकारी उचित नहीं होती है इसके बारे में हम आइए विस्तार से जानते हैं

गर्भपात कराने के प्रचलित तरीके।। Abortion karane ke tarike

हमने आपको ऊपर भी बताया था कि किसी भी महिला अपने गर्भ को 2 तरीकों की सहायता से गिरवा सकती है पहला था गोलियों की सहायता से और दूसरा सर्जिकल गर्भपात

गोलियों की सहायता से गर्भपात या अबॉर्शन कराने का तरीका।। Medical abortion in Hindi

जब किसी साधारण डॉक्टर की सहायता से गर्भपात को घर पर ही करवाने की कोशिश की जाती है तो उसको साधारण कर पाती या फिर गोलियों से गर्भपात करना कहा जाता है। जिन गोलियों का इस्तेमाल गर्भपात कराने के लिए किया जाता है उन गोलियों को एबॉर्शन पिंपल्स (abortion pills) के नाम से जाना जाता है

आपको बता दें कि गोलियों के सहायता से गर्भपात शुरुआती 10 हफ्तों (first 10 weeks of the pregnancy) तक ही करवाना सुरक्षित और असरदार रहता है। अधिक समय के बाद गोलियों की सहायता से गर्भपात करवाने से शरीर में ऐंठन और रक्तचाप की शिकायत हो सकती है

गर्भपात कराने का दूसरा तरीका–सर्जिकल गर्भपात या एबॉर्शन।। Surgical abortion in Hindi

इस प्रकार का गर्भपात है किसी अच्छे डॉक्टर की निगरानी में किया जाता है। और यह गर्भपत घर में ना करके किसी क्लीनिक या फिर किसी बढ़िया अस्पताल के अंदर किया जाता है जिसको सर्जिकल गर्भपात कहा जाता है

लेकिन इस प्रकार का गर्भपात तभी संभव है जब किसी महिला की गर्व की अवस्था 10 शब्दों से अधिक समय की हो अन्यथा 10 शब्द से कम अवधि के गर्भपात को आप गोलियों की सहायता से भी कर सकते हैं। किसी भी महिला को गोलियों की सहायता से गर्भपात कराने से पहले अपने नजदीकी डॉक्टर से सलाह अवश्य ले ताकि उसके स्वास्थ्य पर कोई गहरा प्रभाव ना पड़े

गर्भपात कराने के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। Abortion tips in Hindi

गर्भपात किसी भी कारण से हुआ हो या फिर किसी भी विधि को अपनाकर किया गया हो अबॉर्शन पिंपल से या सर्जिकल अबॉर्शन से मगर गर्भपात के बाद महिला के स्वास्थ्य पर किसी ना किसी प्रकार का प्रभाव अवश्य पड़ता है इसलिए किसी भी महिला को गर्भपात कराने के बाद स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां अवश्य बरतनी चाहिए और अपने जीवन को फिर से शुरू कर सकती है करने की कोशिश करें

गर्भपात कराने के बाद महिला के शरीर पर क्या प्रभाव विशेषकर पड़ता है?

दोस्तों गर्भपात किसी भी महिला के लिए बहुत बड़ी विकट समस्या उत्पन्न कर देती है और गर्भपात करते समय हर महिला को अत्यंत पीड़ा भी सहन करनी पड़ती है। गर्भपात कराने से महिला को ना केवल शारीरिक तकलीफ होती है बल्कि शारीरिक तकलीफ के साथ-साथ गर्भवती महिला को मानसिक तकलीफ क भी सामना करना पड़ता है। गर्भपात के समय महिला में कई तरह के प्रभाव देखने को मिलती हैं जैसे

किसी महिला में गर्भपात के प्रभाव शरीर और मन मस्तिक पर है इस प्रकार देखने को मिलते हैं। Abortion tips in Hindi

  • ज्यादातर महिलाएं गर्भपात करने के बाद शारीरिक पीड़ा उनसे गिर जाती है
  • जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो उसके अचानक के स्वभाव में परिवर्तन आने लगता है जैसे अधिक गुस्सा आना या अधिक खुश हो जाने की आदत है लग जाती है
  • गर्भपात के बाद महिला के शरीर की मांसपेशियों में ऐंठन होने लगती है
  • महिला के गर्भपात के बाद शरीर में कमजोरी आने की वजह से हर वक्त थकान महसूस होने लगती है
  • स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ जाने से दर्द और जी मिचलाने लगता है
  • गर्भपात होने से महिला की योनि और पेट के आसपास के हिस्सों में हल्का या ज्यादा दर्द होने लगता है
  • महिला में गर्भपात कराने से शारीरिक कमजोरी आ जाने के कारण सेक्स करने की इच्छा में गिरावट आ जाती है
  • स्वभाव चिड़चिड़ा होने की वजह से गर्भपात के बाद महिलाएं अकेलेपन को ज्यादा पसंद करने लगती है

गर्भपात के बाद महिला की योनि से रक्त स्राव क्यों होने लगता है और बरती जाने वाली सावधानियां। Abortion tips in Hindi

जब किसी महिला का गर्भपात किया जाता है तो प्रत्येक महिला के सामने बिल्डिंग या फिर सपोर्टिंग होना आमवात सी हो जाती है। हालांकि गर्भपात के बाद रक्त के धक्कों वाला भारी या हल्का रथ सराव सामान्य है पर यदि रक्त के धक् बहुत बड़े हो जैसे छोटी बोल जितने बड़े हो तो यह मेडिकल अमर जेंसी के संकेत होते हैं

इसके अलावा जब किसी महिला के गर्भपात होने के बाद भागीरथ साव हो रहा हो और यह रक्त स्राव लगातार 1 घंटे से दो-तीन घंटे में मेक्सी पैड का इस्तेमाल या फिर 12 घंटों से ज्यादा गर्भपात महिला का आरक्षण जारी रहता है तो यह चेतावनी जरूर होता है ऐसी परिस्थिति में आपको तुरंत मेडिकल इमरजेंसी की सहायता अवश्य लेनी चाहिए

जब भी किसी गर्भपात महिला को रक्तस्राव (heavy bleeding) के साथ-साथ महिला के पेट के निचले हिस्से में या फिर महिला की योनि के क्षेत्र में या फिर योनि के आसपास दर्द महसूस होता हो या फिर कनकनी होने लगती हो, या कर पाते महिला को तेज बुखार आ जाता है तो ऐसी परिस्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना अमर वरदान से कम नहीं होता है

गर्भपात होने पर कितने दिनों के बाद सेक्स करना सुरक्षित रहता है? Garbhpat ke bad sex kab karna chahie

whats is de safety time to have sex after abortion

गर्भपात की स्थितियां भी कई तरह से उत्पन्न होती है और उसको अलग अलग विधियों की सहायता से भी आप आसानी से निपटा सकते हैं वैसे में अनचाहे गर्भ को गिराना कानूनी अपराध है लेकिन विपरीत परिस्थितियों में किसी महिला के सामने इस प्रकार का माहौल भी पैदा हो जाता है। शारीरिक संबंध है महिला के गर्भपात होने के विषय में अलग-अलग समय पर संबंध बनाना सुरक्षित होता है

क्योंकि यह महिला के गर्भपात होने की अवस्था पर निर्भर करता है कि महिला का गर्व कितने समय का गिरा है। जब किसी महिला का दो से तीन हफ्तों तक का गरबा गिरता है तो उसको ज्यादा दिक्कत है नहीं होती है यदि किसी महिला का गर्भ है 5 से 6 महीने का हो जाने के बाद गिरता है तो उसको सेक्स से संबंधित कुछ सावधानियां उसे बरतनी चाहिए ताकि उसके गर्भ को नुकसान ना पहुंचे

पहली स्थिति में गर्भपात होने के कितने दिनों के बाद है सेक्स करना सुरक्षित होता है।safe abortion

सामान्य रूप से जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो चिकित्सा सलाह के अनुसार उस महिला को कम से कम 2 हफ्तों तक शारीरिक संबंध जानी सेक्स करने से बचना चाहिए।

गर्भपात के तुरंत बाद सेक्स क्यों नहीं करना चाहिए?

किसी भी महिला को गर्भपात के तुरंत बाद कभी भी बोलकर सेक्स यानी शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं तो आप के लिए यह असुरक्षित साबित हो सकता है और भविष्य में आप दोबारा गर्भधारण करने में समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो उसके बाद गर्भाशय का मुंह खुला हो जाता है इसका बंद होना महिला के गर्भ के समय पर निर्भर करता है कि गर्भ कितने समय काल का था यानी गर्भ की अवधि कितनी थी

इस प्रकार जब तक गर्भाशय का मुंह है यानी गरबा से गिरवा बंद होकर पूरी तरह से अपने मूल आकार में नहीं आ जाता तब तक आपको शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। क्योंकि महिला का शरीर आंतरिक रूप से सामान्य रूप में अन्य में समय लेता है

जब तक महिला का शरीर आंतरिक रूप से सामान्य नहीं हो जाता या यूं कहें कि सरविक्स की ओपनिंग बंद नहीं हो जाती तब तक महिला को गर्भपात के बाद संबंध बनाने से लंबे समय तक बचना चाहििए

दूसरी स्थिति में गर्भपात होने के बाद शारीरिक संबंध कब बनाना चाहिए। Abortion ke baad sex kab Karen

जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो करवा से से परसों और गर्भपात दोनों ही स्थितियों में योनि से रक्तस्राव होता है। जब यह रक्त स्राव गर्भपात की स्थिति में यदि अपने आप होता है तो तब यह भ्रूण के बच्चे टुकड़ों के रूप में यह रक्त साफ होता है और जब किसी महिला की सर्जरी की जाती है तो इन टुकड़ों को निकाल दिया जाता है तो उसके बाद यह रक्त स्राव रुक जाता है

लेकिन कभी-कभी कुछ स्थितियों में सर्विक्स या फिर गिरवा के फट जाने की वजह से यह रिसाव की समस्या उत्पन्न हो जाती है ऐसी स्थिति में सर्जरी द्वारा ग्रीवा में टंकी लगाकर इससे रक्त स्राव को रोकने का प्रयास किया जाता है

स्पष्ट रूप से डॉक्टरों की सलाह के अनुसार जब तक के गर्भपात महिला की योनि का रक्त स्राव पूरी तरह से बंद नहीं हो जाता या नहीं रक्त बहना रुक नहीं जाता तब तक अबॉर्शन के बाद आपको शारीरिक संबंध बनाने से बजना चाहिए ताकि आने वाले समय में आप को गर्भधारण करने में दिखते उत्पन्न ना हो

तीसरी परिस्थिति में गर्भपात होने पर सेक्स कब करना चाहिए? Abortion ke bad sex karne ka samay

किसी भी महिला के लिए समय पूर्ण होने से पहले यदि गर्भ नष्ट हो जाता है यानी गर्भपात हो जाता है तो इस प्रकार की घटना ना केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी दुखदाई होती है। जिसके चलते महिला के शरीर में अनेक प्रकार के कष्ट होने लगती हैं जैसे पेट में दर्द होना, कमर में दर्द होना और पैरों में भी दर्द से लगातार जुंझती रहती है। जिसकी वजह से महिला में मानसिक तनाव और अवसाद भी महिला में विभिन्न प्रकार के दर्द को बढ़ावा दिन लगते हैं

गर्भपात के बाद क्या करना चाहिए महिला के साथ। Abortion karane ke bad kaun si savdhani rakhe

जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो वह शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के कष्टों को जलने लगती है ऐसी परिस्थिति में यदि हम उस महिला को अच्छा पौष्टिक आहार देने के साथ-साथ उसको भरपूर प्यार और समाज के सभी सदस्यों को उसका सम्मान करना चाहिए जिससे कि उसकी भावनाओं को किसी प्रकार का ठेस न पहुंचे

जिसकी वजह से महिला अपने परिवार में शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ व सम्माननीय महसूस करने लगे। जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो उस महिला को पूरी तरह से ठीक होने के बाद ही सेक्स करना चाहिए। ऐसी परिस्थिति में महिला के पाटनर का भी यह कर्तव्य बनता है कि उसके मानसिक और शारीरिक स्थितियों को समझते हुए उनकी मदद करनी चाहिए और अपनी कामवासना पर भी कंट्रोल करना चाहिए

चौथी परिस्थिति में गर्भपात होने के बाद सेक्स करने का समय।। Hindi abortion warning tips

जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो उस महिला के शरीर में पेशाब का और योनि में इंफेक्शन होने का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है ऐसी परिस्थिति में यदि आप अपने पार्टनर को शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करते हैं तो यह आपका एक गलत विहार होगा कि आप अपने पार्टनर को खतरे में डाल रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में शारीरिक संबंध बनाना यानी इंफक्शन को बढ़ावा और मदद देने के बराबर होता है

इसलिए आपको जब तक गर्भपात की हुई महिला पूरी तरह से स्वस्थ ना हो जाए और रुई के पेड़ से स्वयं को सुरक्षित नए कर ले और दैनिक कार्य नहीं करने लग जाए उसमें तक आपको शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए

गर्भपात होने के बाद महिलाओं को किस प्रकार की सावधानियां बरतनी चाहिए।।Precautions to be taken after abortion

एक गर्भपात की हुई महिला के साथ सेक्स तभी करना चाहिए जब वह महिला पूरी तरह से शारीरिक और मानसिक रूप से अपने आप को स्वस्थ महसूस नहीं करने लगे। इसके अलावा गर्भपात होने के बाद एक महिला और पुरुष को खास तौर पर कुछ सावधानियों को भी अवश्य भरथना चाहिए जैसे कि

गर्भपात के बाद रखिए खासतौर इन बातों का ध्यान:–

  • जब महिला का गर्भपात होता है तो उसके शरीर में ऐंठन उठने लगते हैं
  • इन ऐंठन को कम करने के लिए महिला को दिन में तीन से चार बार गर्म पानी का नियमित रूप से सेंक करना चाहिए
  • गर्भपात के बाद महिला के शरीर में पानी की कमी आने लगती है जिसकी पूर्ति करने के लिए महिला को पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए
  • जब महिला का गर्भपात होता है तो उसके शरीर में काफी ज्यादा कमजोरी आ जाती है जिसकी वजह से उनको चक्रों और काफी ज्यादा थकान महसूस होने लगती है
  • इस कमजोरी को दूर करने के लिए महिला को अपने घर पर रहकर आराम करना चाहिए, जिससे कि गर्भपात महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होने में मदद मिलती है
  • गर्भपात के कारण महिला के पैरों में ऐंठन और बल पढ़ने की समस्या हो सकती है, इस समस्या से निजात पाने के लिए महिला को पैरों पर मालिश करते रहना चाहिए
  • जब किसी महिला का गर्भपात हो जाता है तो उसको अधिक के कठिन कार्यों से और ज्यादा वजन उठाने से बचना चाहिए
  • गर्भपात की वजह से महिला के स्तनो का आकार काफी बढ़ने लगता है इससे बचने के लिए महिला को सही साइज की ब्रा का चयन करना चाहिए, जिससे कि आपके स्तनों का साइज आकर्षित बना रहे

गर्भपात हो जाने के बाद दोबारा गर्भधारण कब करना चाहिए।। Garbhpat ke bad garbhdharan karne ka uchit samay

when to get pregnancy after abortion:–जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो उस महिला को असहनीय पीड़ा होने लगती है जो उस महिला के लिए अत्यधिक के मानसिक तनाव का कारण बन जाता है। बहुत बार महिलाएं खुद को एबॉर्शन का कारण मानकर डिप्रेशन में चली जाती है

लेकिन कुछ महिलाओं को मां बनने की दिलचस्पी इतनी ज्यादा या फिर परिवार के तनु की वजह से गर्भपात की हुई महिलाएं एबॉर्शन के तुरंत बाद प्रेग्नेंट होने के लिए तैयार हो जाती है। लेकिन इस प्रकार का फैसला आपके जीवन को खतरे में डाल सकता है। कभी भी किसी भी महिला को एबॉर्शन के तुरंत बाद गर्भ धारण नहीं करना चाहिए

जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो उस महिला का शरीर सामान्य अवस्था में आने में कुछ समय लेता है। बहुत सारी महिलाओं के दिमाग में अक्सर इस प्रकार के सवाल रहते हैं कि गर्भपात के कितने दिनों के बाद शारीरिक संबंध बनाने चाहिए या फिर एबॉर्शन के कितने दिनों के बाद वे दोबारा से प्रेगनेंट हो सकती है

अधिकतर डॉक्टर एबॉर्शन के 15 दिनों से अधिक होने के बाद ही आपको सारिक संबंध यानी सेक्स बनाने की सलाह देते हैं। इसके अलावा यदि कोई महिला अगर पाद के बाद प्रेग्नेंट होने की इच्छुक होती है तो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उस महिला को कम से कम 3 महीने तक के दोबारा प्रेग्नेंट नहीं होना चाहिए। यदि कोई महिला अगर पाठ के 20 से 25 दिन के बाद प्रेग्नेंट होती है तो प्रेग्नेंसी के समय खतरा उत्पन्न हो सकता है

गर्भपात के बाद महिला का शरीर सामान्य अवस्था में कब तक आ जाता है।। Abortion ke bad sex ka Sahi time

जब किसी महिला का गर्भपात होता है तो उस महिला के शरीर में काफी ज्यादा बदलाव आ जाते हैं और इन बदलाव को सामान्य अवस्था में और सर जी को मानसिक तनाव से उबरने के लिए कम से कम उस महिला को 3 महीने का वक्त लग जाता है। इन तीन महीनों के दौरान हार्मोन का सत्र भी सामान्य हो जाता है और यह 3 महीने का उपयोग महिला अपने आप को दोबारा से प्रेगनेंट होने की तैयारी में लगा सकती है